चीन ने धमकी दी है कि अगर भारत ने लंबी दूर तक मार करने वाली मिसाइलें बनाना जारी रखा तो वह पाकिस्तान को भी ऐसी मिसाइलें बनाने में मदद देगा। अन्यथा इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा और दक्षिण एशिया में अस्थिरता तथा अशांति फैल जाएगी। भारत ने पिछले महीने 5000 किलोमीटर तक मार
करने वाली अग्नि -5 और अग्नि 4 मिसाइलों का सफल परीक्षण किया था। ये चीन और पाकिस्तान दोनों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुुआ चुनयिंग ने गुरुवार को भारतीय प्रवक्ता के बयान का स्वागत किया है जिसमें कहा गया था कि ये मिसाइल परीक्षण किसी देश विशेष के खिलाफ नहीं हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। अग्नि मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। इस पर चीन की प्रवक्ता ने कहा कि इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र ने नियम बना रखे हैं। वहीं चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है। प्रवक्ता ने कहा कि मिसाइल 5000 किलोमीटर तक मार कर सकती है इसका मतलब है कि वह चीन को भी निशाना बना सकती है। इससे दक्षिण एशिया की शांति और स्थायित्व को खतरा है।
ब्रिटेन के सांसद भी हैं नाराज: भारत द्वारा शुरू किए महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम से ब्रिटेन की मीडिया और कई ब्रिटिश सांसद काफी नाराज हैं। डेली मेल ने भारत को आर्थिक मदद रोकने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। उसने लिखा है भारत एक ओर तो ब्रिटेन से सहायता राशि लेता है और दूसरी तरफ महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन को शुरू करने की शेखी भी बघारता है। भारत ने अगले महीने 103 उपग्रह एक साथ छोड़ने की घोषणा की है। इससे वह दुनिया की सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो जाएगा। बेहद तल्ख अंदाज में अखबार लिखता है कि भारत को जी रही आर्थिक मदद के बराबर रकम से 1 करोड़ 80 लाख लोगों को गर्म खाना खिलाया जा सकता है। बीमार और बूढ़े गरीब पेंशनर्स के लिए खाने का इंतजाम किया जा सकता है। करीब 5 अरब 84 करोड़ की सहायता राशि विभिन्न तरीकों से भारत में भेजी गई। इसके लिए ब्रिटिश सरकार को गरीबों के लिए अपनी कई योजनाएं बंद करनी पड़ी हैं।
दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा को देखते हुए मैं नहीं चाहता कि भारत को ब्रिटेन की ओर से और आर्थिक सहायता मिले।' - ब्रिटिशसांसद पीटर बोन
अगर भारत के पास रॉकेट्स पर खर्च करने के लिए पैसा है, तो हमें यह पूछना चाहिए कि उन्हें आर्थिक मदद समझदारी है या नहीं।' - ब्रिटिश सांसद एंड्रयू रोजिनडेल
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साभार: भास्कर समाचार
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