Sunday, July 10, 2016

25 महीने बाद सुलझा मामला: 20 साल छोटी महिला कांस्टेबल से इश्क़; अड़चन बनी तो नहर में धकेला

यहमामला चंडीगढ़ पुलिस में चालक रविन्द्र सिंह और कांस्टेबल रीटा के प्रेम संबंध के खौफनाक अंत का है। 20 साल छोटी रीटा प्रेमी और उसकी पत्नी के बीच अड़चन बनी तो रविन्द्र ने 8 जून, 2014 को करनाल के काच्छुवा गांव के पास नहर में धक्का दे दिया। 25 माह से अपहरण के केस में उलझी पुलिस ने शनिवार को इस केस का खुलासा कर रविन्द्र को गिरफ्तार कर लिया। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। रविन्द्र करनाल के नरूखेड़ी गांव का रहने वाला है। 17 साल तक सेना में सर्विस करके रिटायर्ड हुआ और पुलिस में भर्ती हो गया। अभी आरोपी चंड़ीगढ़ के सेक्टर 26 थाने में ड्यूटी कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद रीता को मरा हुआ समझकर पुलिस उसके शव की तलाश में जुटी है। फिलहाल, आरोपी को आईपीसी की धारा 307 हत्या के प्रयास में गिरफ्तार किया है। पुलिस पहले इस केस को अनट्रेस बताकर बंद कर चुकी थी। रीटा के पिता रमेश की याचिका नवंबर 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर केस को रिओपन हुआ था। 
पानीपत के चुलकाना की रहने वाली रीटा 2014 में चंड़ीगढ़ के सेक्टर 17 थाने की पीसीआर में तैनात थी। रविन्द्र इस पीसीआर का चालक था। दोनों में संबंध बन गए। रीटा सहेली के साथ सेक्टर 17 में ही रहती थी। प्रेम संबंध होने के बाद वह अकेली रहने लगी। रविन्द्र को पत्नी और रीटा को समय देना मुश्किल हो रहा था। रीटा ने उस पर शादी का दबाव भी बनाया। रीटा प्रेमी उसके पत्नी के बीच अड़चन बन गई। इसलिए प्रेमी ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश बनाई। 7 जून 2014 को रीटा छुट्टी पर चुलकाना आई थी। आरोपी ने फोन करके जम्मू घूमने का प्लान बताया। आरोपी भी 15 दिन की छुट्टी लेकर घर पर गया। 8 जून को दोनों को कुरुक्षेत्र के पीपली में मिलना था। लेकिन रीटा करनाल में ही उतर गई। उसने फोन करके प्रेमी को करनाल ही आने को कहा। आरोपी बाइक लेकर पहुंच गया। दोनों करनाल में घूमते रहे। रात होने पर करनाल से कैथल जाने वाले रास्ते पर ले गया। रीटा ने पूछा तो आरोपी ने जम्मू के लिए सुबह ट्रेन होने का बहाना बनाया। काच्छुवा गांव के पास बहाने से बाइक रोकी। मौका मिलते ही रीटा को नहर में धक्का दे दिया और उसके ऊपर पत्थर फेंक दिए। आरोपी ने उसका मोबाइल पर्स भी नहर में फेंक दिया। कपड़ों का बैग अपने साथ ले गया। दूसरे दिन उसको पट्टी कल्याणा गांव के पास छोड़ दिया। बैग में कपड़ों देखकर चुलकाना गांव के एक व्यक्ति ने पहचान की। उसने 15 जून 2014 को बैग को रीटा के घर पहुंचा दिया। इसके बाद रीटा के पिता ने चंड़ीगढ़ के सेक्टर 17 में अपहरण का मामला दर्ज करवाया। 28 अगस्त 2014 को केस समालखा थाने से संबंधित होने के कारण ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस ने मामले में 26 जून 2015 को अनट्रेस बताकर बंद कर दिया था। 

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साभार: भास्कर समाचार 
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