सरकार ने मॉडल शॉप्स एंड इस्टेब्लिशमेंट बिल, 2016 को मंजूरी देते हुए दुकान, मॉल्स, शॉपिंग सेंटर, सिनेमा हॉल और अन्य व्यवसायों को सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे खुले रखने की अनुमति दे दी है। देश में तेजी से बढ़ रही रिटेल इंडस्ट्री की रफ्तार इससे और बढ़ने की उम्मीद है। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है
कि इस फैसले से रिटेल सेक्टर में वर्ष 2020 तक कर्मचारियों की संख्या में 50 फीसदी इजाफा हो सकता है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। फिलहाल करीब 4 करोड़ लोगों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार का जरिया रिटेल इंडस्ट्री है, लेकिन अगले चार वर्षों में ही यह संख्या 6 करोड़ हो जाने का अनुमान है।
नौकरियों के नए अवसर अलग-अलग स्तरों पर होंगे और जरूरी योग्यता प्राप्त छात्र स्टोर मैनेजमेंट, रिटेल मैनेजमेंट, विजुअल मर्केंडाइजिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, प्लानिंग जैसे सेक्टर में नियुक्त हो सकते हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार वर्ष 2015 में देश की रिटेल इंडस्ट्री का सालाना कारोबार 600 अरब डॉलर था, लेकिन 2020 तक इसके दोगुना हो जाने की उम्मीद है और इसकी क्षमता 1.3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगी। ट्रैडिशनल रिटेल के मुकाबले माडर्न रिटेल के विस्तार की रफ्तार करीब दोगुनी होगी।
मार्केटिंग से लेकर ब्रैंडिंग और लाजिस्टिक्स में नौकरियां: रिटेलइंडस्ट्री में नौकरियों के अधिकतर अवसर सेल्स और मार्केटिंग में हैं, लेकिन सप्लाय चेन डिस्ट्रीब्यूशन, लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउस मैनेजमेंट, ब्रैंडिंग जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं मौजूद हैं। रिटेल कंपनियों में कस्टमर केयर और पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट के अलावा एडवर्टाइजिंग एजेंसी, एयरलाइंस, इंश्योरेंस कंपनी और बैंकों में भी रिटेलिंग का कोर्स करने वाले छात्रों को नियुक्त किया जाता है।
एंट्री के लिए रिटेल मैनेजमेंट सबसे अच्छा विकल्प: किसी भी स्ट्रीम में बैचलर डिग्री के बाद छात्र रिटेल इंडस्ट्री में एंट्री ले सकते हैं, लेकिन मैनेजमेंट की डिग्री हो तो इसमें आसानी हो सकती है। मार्केटिंग, ह्यूमन रिसोर्स, ऑपरेशंस और फाइनेंस के अलावा रिटेल मैनेजमेंट का डिग्री या डिप्लोमा कोर्स भी इसमें मददगार हो सकता है। ये कोर्स देशभर के संस्थानों में मौजूद हैं। मैनेजमेंट के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश कॉमन एडमिशन टेस्ट के जरिये मिलता है। अधिकतर बाकी संस्थानों में भी एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।
दो से तीन लाख रुपए सालाना पैकेज, विदेशों में भी अवसर: मैनेजमेंट की डिग्री लेकर रिटेल इंडस्ट्री में प्रवेश लेने वाले युवाओं का शुरुआती सालाना पैकेज दो से तीन लाख रुपए सालाना होता है। तीन-चार वर्षों का अनुभव मिलने के बाद सालाना कमाई छह लाख रुपए से ज्यादा हो सकती है। लॉजिस्टिक्स प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी 4 लाख रुपए सालाना तक होती है। इस फील्ड में युवाओं के लिए विदेश में नौकरी करने के विकल्प भी हैं। अमेरिका, यूके और मध्यपूर्व के देशों में भारतीय प्रोफेशनल्स की काफी मांग है और उन्हें भारत के मुकाबले दोगुने से ज्यादा पैकेज भी मिल सकता है।
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साभार: भास्कर समाचार
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