उत्तर भारत के महत्वपूर्ण आस्था स्थल श्रीमाता मनसा देवी मंदिर में दर्शनों के लिए शुल्क तय करने का प्रस्ताव खारिज हो गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीआइपी दर्शनों के लिए शुल्क संबंधी प्रस्ताव आते ही उसे खारिज कर दिया। अब श्रद्धालु सामान्य तरीके से लाइन में लगकर दर्शन कर सकेंगे और अमीर-गरीब का कोई
भेद नहीं रहेगा। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। श्रीमाता मनसा देवी मंदिर पूजा स्थल बोर्ड की पंचकूला में हुई सोलहवीं बैठक में माता की फोटो वाले सोने के सिक्के बेचने की जांच पूरी नहीं होने का मामला भी उठा। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए और जल्दी रिपोर्ट सौंपने को कहा। पिछली सरकार में माता मनसा देवी की फोटो वाले सोने के सिक्के बनवाए गए थे। सोना महंगा हुआ तो ये सिक्के बेच दिए गए। बैठक में वीआइपी दर्शनों के लिए 1100 रुपये का शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी पेश हुआ था। यदि कोई श्रद्धालु लाइन से अलग हटकर मंदिर के बाहर तक पहुंचकर दर्शन करना चाहेगा तो उसके लिए 100 रुपये और मंदिर के भीतर तक पहुंचकर दर्शन करने के लिए 1100 रुपये के शुल्क के प्रस्ताव थे। इन दोनों प्रस्तावों का व्यापक विरोध हो रहा था। बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने जब यह एजेंडा आया तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया है। स्थानीय निकाय मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मंदिर में पुरानी पंरपरा कायम रहेगी। बोर्ड के कुछ सदस्य इस पक्ष में थे कि पैसे लेकर पहले दर्शन कराए जाएं, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा इस एजेंडे को नकार दिए जाने के बाद उन्होंने चुप्पी साध ली।
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भेद नहीं रहेगा। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। श्रीमाता मनसा देवी मंदिर पूजा स्थल बोर्ड की पंचकूला में हुई सोलहवीं बैठक में माता की फोटो वाले सोने के सिक्के बेचने की जांच पूरी नहीं होने का मामला भी उठा। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए और जल्दी रिपोर्ट सौंपने को कहा। पिछली सरकार में माता मनसा देवी की फोटो वाले सोने के सिक्के बनवाए गए थे। सोना महंगा हुआ तो ये सिक्के बेच दिए गए। बैठक में वीआइपी दर्शनों के लिए 1100 रुपये का शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी पेश हुआ था। यदि कोई श्रद्धालु लाइन से अलग हटकर मंदिर के बाहर तक पहुंचकर दर्शन करना चाहेगा तो उसके लिए 100 रुपये और मंदिर के भीतर तक पहुंचकर दर्शन करने के लिए 1100 रुपये के शुल्क के प्रस्ताव थे। इन दोनों प्रस्तावों का व्यापक विरोध हो रहा था। बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने जब यह एजेंडा आया तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया है। स्थानीय निकाय मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मंदिर में पुरानी पंरपरा कायम रहेगी। बोर्ड के कुछ सदस्य इस पक्ष में थे कि पैसे लेकर पहले दर्शन कराए जाएं, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा इस एजेंडे को नकार दिए जाने के बाद उन्होंने चुप्पी साध ली।
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साभार: जागरण समाचार
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