वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने पर छोटे रेस्तरां में खाना सस्ता हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने 50 लाख रुपये तक के सालाना कारोबार पर सिर्फ पांच प्रतिशत (ढाई प्रतिशत केंद्र का और ढाई प्रतिशत राज्य का) जीएसटी लगाने का फैसला किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की
यहां हुई 11वीं बैठक में जीएसटी के तहत प्रस्तावित कंपोजीशन स्कीम में छोटे रेस्तरां की सेवाओं को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। फिलहाल स्कीम की सुविधा 50 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटों को ही देने का प्रस्ताव था। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि कम कारोबार वाले रेस्तरां को कंपोजीशन स्कीम में शामिल करने की मांग की गई थी। इसलिए काउंसिल ने 50 लाख रुपये तक के कारोबार वाले रेस्तरां को स्कीम के दायरे में लाने का फैसला किया। इस सीमा से अधिक का कारोबार करने वाले रेस्तरां पर जीएसटी की निर्धारित दर लागू होगी। फिलहाल रेस्तरां में खाने पर लगभग छह प्रतिशत सेवा कर लगता है। दरअसल रेस्तरां के कुल बिल की 40 प्रतिशत राशि पर ही यह सर्विस टैक्स लगता है। सेवा कर की मौजूदा दर 15 फीसद है। रेस्तरां में खाने के कुल बिल के 40 प्रतिशत पर इसे लागू करने पर सेवा कर की प्रभावी दर करीब छह प्रतिशत बैठती है।
मिलेगा कंपोजीशन स्कीम का फायदा: कंपोजीशन स्कीम के तहत कारोबारियों को पंजीकरण तो कराना होता है, लेकिन उन्हें कर भुगतान के आकलन के संबंध में काफी सरल प्रक्रिया का लाभ उपलब्ध कराया जाता है। उन्हें कागजी प्रक्रिया भी ज्यादा नहीं करनी पड़ती।
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साभार: जागरण समाचार
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