Friday, December 30, 2016

फोन ट्रैकिंग: कंपनियों द्वारा कस्टमर की पसंद प्रभावित करने का नया तरीका

फिनलैंड की रिटेल एनालिटिक्स फर्म वाकबेस के एडवर्ड आर्मिशा आइनों से ढंके एक खंभे की ओर इशारा कर कहते हैं, वहां ऊपर देखो। लंदन की ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट के इस डिपार्टमेंट स्टोर में आइनों में छिपे सेंसर और इस तरह के अन्य डिवाइस कस्टमर के कदमों का पीछा करते हैं। वे उसके स्मार्टफोन से निकलने वाले सिग्नल
पकड़ते हैं। इससे बेखबर एक कस्टमर फिटिंग रूम की ओर बढ़ता है। उधर, वॉकबेस अपने ग्राहक के लिए उसकी गतिविधियों को दर्ज करता है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। 
कई वर्षों से दुकानों में आने-जाने वाले लोगों की गिनती के लिए दरवाजों पर लेज़र सिस्टम लगाए जाते हैं। अमेरिकी फर्म शॉपरट्रैक के निक पोम्पा कहते हैं- इधर पिछले कुछ समय से बिल्डिंग के अंदर कस्टमर पर नजर रखना शुरू किया गया है। यह फर्म लास वेगास, लिवरपूल सहित दुनियाभर में 2,100 शॉपिंग मॉल, स्टोर के लिए काम करती है। ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी शानदार है। कुछ तकनीकों में एलईडी लाइटिंग के माध्यम से स्मार्टफोन के कैमरे को कोड भेजते हैं। इनडोर एटलस कंपनी देखती है कि स्मार्टफोन से किस तरह स्टोर का जियो मैग्नेटिक क्षेत्र अस्त-व्यस्त होता है। मार्केट रिसर्च फर्म रिसर्च एंड मार्केट्स का कहना है- स्मार्टफोन खरीदने वालों की संख्या बढ़ने के साथ बिल्डिंग के भीतर ट्रैकिंग का बाजार वर्ष 2021 तक पांच गुना बढ़कर 1,500 अरब रुपए से अधिक हो जाएगा। 
कस्टमर ट्रैकिंग की गतिविधि से रिटेलर्स को क्या फायदा है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे टेक्नोलॉजी का उपयोग किस हद तक करते हैं। कोई स्टोर यह देखता है कि अक्सर लोग फ्रोजन गुड्स से अल्कोहल की ओर बढ़ते हैं तो वह दोनों वस्तुओं को एकसाथ रख सकता है। रिटेल कंपनी इस जानकारी से भी लाभ उठा सकती है कि कौन-से डिपार्टमेंट बेहतर तरीके से वस्तुओं की मार्केटिंग कर रहे हैं। 
अगर रिटेल स्टोर ग्राहकों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी देने के लिए राजी कर सके तो उन्हें अधिक फायदा होगा। एबीआई रिसर्च के अनुसार विश्व में लगभग दो लाख दुकानों के पास वाई-फाई सहित फोन ट्रैक करने के सिस्टम हैं। वाई-फाई के माध्यम से स्टोर कस्टमर की ऑनलाइन सर्च हिस्ट्री और किसी स्थान पर उनकी मौजूदगी पर नजर रख सकते हैं। 
नेटवर्क प्रोवाइडर ह्यूज यूरोप के डैन थॉर्टन कहते हैं- इससे दुकानदारों के लिए सोने की खदान खुल सकती है। रिटलेर कस्टमर के फोन पर एकदम व्यक्तिगत और लोकेशन पर आधारित विज्ञापन भेजते हैं। उदाहरण के लिए अगर ऑस्ट्रेलिया के वेस्टफील्ड शॉपिंग मॉल में सूट की दुकान पर कोई व्यक्ति किसी प्रतिद्वंद्वी ब्रैंड के संबंध में गूगल पर खोजबीन कर रहा है, तो दुकान को इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी स्काईफी कस्टमर को फौरन डिस्काउंट भेजने के लिए तैयार रहती है। ब्रिटिश फर्म इस्पॉस रिटेल परफॉर्मेंस के टिम डेनिसन कहते हैं- ऐसी दुनिया, जिसमें रिटेल कंपनी गैप हर कस्टमर का व्यक्तिगत तौर पर स्वागत करती है, में आगे बढ़ने की गति बहुत धीमी है। यह इसलिए कि अधिकतर दुकानें लोगों पर नजदीक से नजर रखने से बचती हैं। विशेष रूप से यूरोपीय दुकानदार चिंतित रहते हैं कि ऐसा करने से प्राइवेसी को लेकर विरोध भड़क सकता है। ऐसी चिंताएं जल्द ही खत्म हो सकती हैं। एपल और गूगल ने बिल्डिंग के अंदर लोकेशन खोजने की टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है। 
एबीआई रिसर्च के पेट्रिक कोनोली का कहना है- दोनों कंपनियों की रिटेल इंडस्ट्री पर बम गिराने की योजना है। वर्तमान में आईफोन या एंड्रॉयड हैंडसेट उसके मालिक को दुकानों तक जाने का रास्ता बता सकते हैं, लेकिन वे अंदर कुछ नहीं कर सकते हैं। क्योंकि जीपीएस सैटेलाइट सिग्नल दीवारों से टकराकर लौट आते हैं, जिससे स्मार्टफोन स्वयं का स्थान पता नहीं लगा पाता है। 
अब दोनों कंपनियां रिटेलरों को बिल्डिंग के अंदर लोकेशन का पता लगाने की सेवाएं ऑफर कर रही हैं। वाई-फाई के नक्शे या रेडियो फ्रीक्वेंसी संकेतों से पता लग सकेगा कि मोबाइल हैंडसेट का मालिक कहां है और कहां जा रहा है। दुकानों को अपने कस्टमर के फोन का पीछा करने के लिए सिस्टम लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अमेरिका के 100 बड़े स्टोर में से लगभग 30 स्टोर गूगल या एप की मैपिंग टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहे हैं। इसलिए दुकान में जाकर खरीदारी करने की दुनिया ऑनलाइन जैसी हो सकती है। इसके केन्द्र में आपका फोन होगा जो जानता है कि आप क्या चाहते हैं और वह आपको उसके पास तक ले जाएगा।
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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