Wednesday, July 16, 2014

मोटापा दूर करने के कुछ और नियम व नुस्खे

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आजकल सभी लोगों की जिंदगी इतनी व्यस्त हो गई है कि वे अपनी हेल्थ की ओर ध्यान ही नहीं दे पा रहे हैं। इसके कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, जिनमें से सबसे आम समस्या है पेट बढ़ने यानी की मोटापे की।  इससे लोग अक्सर परेशान रहते हैं और पेट कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं। लेकिन, सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि पेट निकलने के क्या कारण हैं। तो चलिए हम आपको बताने जा रहे हैं इसके कारण और इस समस्या से छुटकारा पाने के आसान उपाय:
इन कारणों से बढ़ रहा मोटापा: 

  • आजकल लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं। वो सिर्फ टीवी व कम्प्यूटर के आगे घंटों तक बैठे रहते हैं। इसके कारण उनमें मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है।
  • लोग घर का खाना खाने की जगह जंक फूड व बाहर का खाना अधिक खा रहे हैं। कुछ लोग समय की कमी के कारण तो कुछ स्वाद के चलते इनका सेवन कर रहे हैं, जिसके कारण मोटापा बढ़ रहा है।
  • भागदौड़ की जिंदगी में लोगों के पास इतना भी समय नहीं कि वो एक्सरसाइज के लिए समय निकाल सकें। नतीजतन मोटापा बढ़ता जा रहा है।
  • कुछ लोग भूख से ज्यादा खा लेते हैं, तो कुछ डायटिंग के चक्कर में ठीक से खाना नहीं खाते। इसके कारण मोटापे की समस्या पैदा होता है। 
  • कई बार लोग जरूरत से ज्यादा तनाव ले लेते हैं। तनाव व अवसाद जैसी समस्या मोटापे को बढ़ाती हैं। 
खान-पान पर दें विशेष ध्यान:
  • पेट के फैट को कम करना सही खान-पान पर निर्भर करता है। मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रीअंट्स के साथ स्वस्थ और संतुलित आहार लें। सबसे महत्वपूर्ण यह कि फास्ट फूड व अधिक तैलीय पदार्थों का सेवन न करें। जहां तक हो सके घर का बना खाना ही खाएं। अगर आपके पास समय कम है, तो कच्चे फल व सब्जी या भांप से पकी सब्जियां खाएं।
  • नाश्ता लेना न छोड़ें, इससे ब्लोटिंग बढ़ता है और शरीर भूख की अवस्था में चला जाता है। यह पेट में फैट जमा होने का मुख्य कारण है। इसलिए नाश्ते में पौष्टिक आहार शामिल करें।
  • लहसुन, प्याज, अदरक, लाल मिर्च, गोभी, टमाटर, दालचीनी और सरसों फैट कम करने वाले फूड हैं। सुबह-सुबह कच्चा लहसुन और एक इंच अदरक का टुकड़ा खाना अच्छा रहता है। साथ ही, सुबह गुनगुना पानी नींबू का रस और शहद डालकर पीना वजन घटाने में मददगार होता है।
  • खाने में फाइबर युक्‍त भोजन लें। यह आपके शरीर को कोलेस्‍ट्रोल से बचाता है। साथ ही, फाइबरयुक्‍त आहार शरीर की एक्‍स्‍ट्रा कैलोरी को भी बर्न करता है।
  • घंटों वर्कआउट करने या दौड़ने के बजाय थोड़े समय के लिए एक्टिव एक्सरसाइज करें। यह फैट को कम करने में काफी कारगर होता है।
  • पानी की बोतल हमेशा साथ रखें और यह सुनिश्चित करें कि आप पूरे दिन पानी पीते रहें। एक व्यक्ति को​ दिन में 8 से 10 ग्लास पानी की जरूरत होती है। हालांकि, यह आपके वजन और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। इस बात को सुनिश्चित करें कि आप दिनभर में पर्याप्त पानी पीते हों। काम के दौरान बीच-बीच में जूस लेना भी फायदेमंद है।
  • वजन को संतुलित रखने के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी है। हर किसी के लिए 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है। अगर बहुत ज्यादा या बहुत कम सोते हैं, तो इससे वजन बढ़ सकता है।
पश्चिमोत्तानासन: पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं। इसके बाद हथेलियों को घुटनों पर रखकर सांस भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं व कमर को सीधा कर ऊपर की ओर खींचे। अब सांस निकालते हुए आगे की ओर झुकें व हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़कर माथे को घुटनों पर लगा दें। यहां घुटने मुड़ने नहीं चाहिए और कोहनियों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। आंखें बंद कर सांस को सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रोक दें। फिर सांस भरते हुए वापस आ जाएं। 
धनुरासन: पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैर आपस में एक-दूसरे से जुड़े रहें। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें। घुटनों और पंजों के बीच में एक फुट का अंतर रखकर दोनों पैरों के टखनों को हाथों से पकड़ें। हाथों के सहारे दोनों पैरों के घुटने, जांघ और धड़ को सुविधानुसार ऊपर उठाएं। सांस को सहज रखें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पहले वाली स्थिति में आएं। 
भुजगासन: भुजग को इंग्लिश में कोबरा कहते हैं। यह आसन फन फैलाए एक सांप जैसा पॉस्चर बनाता है, इसलिए इसका नाम भुजगासन रखा गया है। इसके लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथ के सहारे शरीर के कमर से ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं, लेकिन कोहनी आपकी मुड़ी होनी चाहिए। हथेली खुली और जमीन पर फैली हो। अब शरीर के बाकी हिस्सों को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ समय के लिए इस पॉस्चर को यूं ही रखें।
कपालभाति: ध्यान के किसी भी आसन में बैठ जाएं। दोनों हथेलियों को घुटनों पर ज्ञानमुद्रा में रखें। आंखों को हल्की बंद करें। नासिका से एक हल्के झटके से श्वास बाहर निकालें और नासिका द्वारा सहज श्वास अंदर लें। यह कपालभाति की एक आवृत्ति है। इसकी 25 आवृत्तियों का एक चक्र करें। एक चक्र के बाद दो-तीन गहरी श्वास लेकर दूसरे चक्र का अभ्यास करें। धीरे-धीरे चक्रों की संख्या बढ़ाते जाएं।
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साभार: भास्कर समाचार
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