Saturday, June 11, 2016

मैनेजमेंट: पहला साहसी कदम उठाएं शेष अपनेआप ठीक होगा

एन रघुरामन (मैनेजमेंट  गुरु)
गुजरे कल का बिज़नेस: 14 साल पहले यहां कोई गांव नहीं था। लोगों के पास खेती की बड़ी जमीन थी और कृषि मुख्य व्यवसाय था। फिर गांव ने नाम हासिल किया - करारिया चौराहा। मध्यप्रदेश में बीना रोड पर भोपाल से यह स्थान 68 और विदिशा से 12 किलोमीटर दूर है। 2002 तक ये सड़क कम ही इस्तेमाल होती थी। इसी समय दिनेश कुमार राय ने यहां चाय की दुकान शुरू की। उद्‌देश्य था कि जब खेती के दिन हो तो गुजारा हो सके। उन्होंने चाय की क्वालिटी हमेशा अच्छी रखी, ताकि ग्राहक लौटकर आए। चूंकि ड्राइवर लोग नाश्ता भी मांगते थे तो दिनेश ने समोसे और कचोरी भी बनाने शुरू किए। सामने ही बनाए जाते और गर्मागर्म दिए जाते। यह बहुत अच्छा बिज़नेस तो नहीं माना जाता था, लेकिन 365 दिन नकद रुपए हाथ में आते थे। करीब छह साल तक यह मोनोपॉली बिज़नेस था और क्वालिटी के कारण नियमित ग्राहकों की संख्या बढ़ती रही। बस ड्राइवर और कंडक्टर को कमीशन देने जैसा मार्केटिंग का कोई हथकंडा दिनेश ने नहीं अपनाया। 
फिर गांव वालों को बिज़नेस की संभावना नज़र आई और 2007 में एक छोटी ऑटोमोबाइल रिपेयर शॉप खुल गई। कई लोगों ने किराना दुकान, कपड़े की दुकान और रेस्तरां खोल लिए। ये लोग इस जगह से तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर रहते थे, इसलिए दुकानों के पीछे ही घर बनाने शुरू कर दिए। सड़क किनारे घरों की संख्या अधिक होने लगी। फिर इस जगह का नाम हो गया करारिया चौराहा गांव। आज नज़ारा अलग ही है। हर कोई इसी स्थान पर रुकता है, जबकि विदिशा जिला मुख्यालय मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पुलिस स्टेशन भी खुल गया है। दिनेश रेस्तरां का नाम अमित रेस्तरां एंड कॉफी हाउस हो गया। यह जाना-पहचाना नाम है। 14 साल में यह व्यावसायिक जगह बन गई है। 

आज का बिज़नेस: यह जानने के बावजूद कि स्टार्टअप्स की दुनिया काफी बड़ी है, इन युवाओं ने एक-एक कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया और पहले नींव मजबूत की। ये जानते हैं कि ग्रॉसरी शॉपिंग नीरस काम है, लेकिन यह भी जानते हैं कि 2019 तक यह भारत में 2.9 अरब डॉलर का बाजार हो जाएगा। उन्होंने सिर्फ दो शहरों को चुना इंदौर और वडोदरा, जहां पैसा तो पर्याप्त है, लेकिन लोग खर्च के मामले में सतर्क रहते हैं। उन्होंने इस व्यवस्था को पुख्ता बनाया कि हर सामान पर्याप्त क्वालिटी चैक के बाद ही डिलिवर हो। 2014 में अभिषेक भट्‌ट, सौरभ श्रीवास्तव, विभा और सुनिता परांजपे ने ग्रॉसरी रिटेल बिज़नेस में प्रवेश किया था और उन्होंने लोकल ग्रॉसरी डिलेवरी प्लेटफॉर्म तैयार किया, नाम है - शॉप इट डेली। उन्हें अपना पहला ग्राहक काम शुरू करने के दो घंटे के भीतर मिल गया था। 90 मिनट के अंदर 25 किलोमीटर के दायरे में गारंटी के साथ डिलेवरी की व्यवस्था है। 
ग्राहकों को नियमित बनाने के लिए फीडबैक लेने का इंतजाम है। फोन, वॉट्सएप, और एसएमएस मैसेज से भी ऑर्डर लेने शुरू किए। उन्होंने कॉर्पोरेट हाउस के कर्मचारियों के साथ ग्रॉसरी उनके घरों पर डिलिवर करने का विशेष अनुबंध किया। वे उन्हें ऐसे समय पर प्रोडक्ट डिलिवर करते हैं जब वे घर पर हों या जो भी उनका सुविधा का समय हो। अब 2016 में जाते हैं। shopitdaily.com सिर्फ दो शहरों में व्यवसाय कर रही है, लेकिन इसके मासिक ग्राहकों की संख्या एक लाख से ज्यादा है। 25 हजार के करीब रजिस्टर्ड ग्राहकों का डेटाबेस है। अब जल्द ही पुणे, नासिक और लखनऊ जैसे टीयर-2 शहरों में काम करने वाले हैं। अपवाद के तौर पर ब्रैंड बिल्डिंग के लिए मुंबई में भी काम शुरू करने वाले हैं। 
फंडा यह है कि बिज़नेस करने के तौर-तरीके पिछले दो दशकों में बदल गए हैं, लेकिन पहला जोखिम भरा कदम उठाना हमेशा जैसा ही है। और यह पूरी तरह हमारे हाथों में है। 

Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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