Tuesday, November 24, 2015

नजरिया: आज ही बनें कल के लीडर

दिनेश अग्रहरि 
आज के इस बेहद प्रतिस्पर्धी युग में किसी भी संगठन को सफल होने के लिए अच्छे लीडर्स की जरूरत होती है। आप कारोबार, सोशल सेक्टर या राजनीति, किसी भी फील्ड में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपको लीडरशिप क्वालिटी सीखनी होगी। ध्यान रहे सिर्फ बॉस या नेता बन जाना ही लीडरशिप नहीं होता। कई
बॉस सिर्फ मैनेजर बनकर रह जाते हैं। मैनेजर सिर्फ नियमों को लागू कराता है, जबकि लीडर रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश करता है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। दूसरों के जीवन में बेहतरी के लिए जो बदलाव लाता है, वही लीडर कहलाता है।
किसे कहते हैं लीडर: बेहतरीन काम करना ही इस बात की गारंटी नहीं है कि आप दूसरों को लीड करने में भी उतने ही कामयाब रहेंगे। जरूरी नहीं है कि एक महान टीचर किसी स्कूल का ग्रेट प्रिंसिपल भी साबित हो। आपके सामने यह सवाल भी आता होगा कि इंडिविजुअल काम करने या लीडरशिप दिखाने में क्या अंतर है? असल में, दोनों परिस्थितियों में काम करने का फोकस ही बदल जाता है। जब आप इंडिविजुअल तरीके से काम करते हैं, तो अपनी सफलता, विकास और नतीजे पर ही आपका पूरा ध्यान होता है। लेकिन एक लीडर के रूप में आपका फोकस दूसरे लोगों की सफलता, उनके सुधार पर होता है और उन्हें यह तरीका सुझाने पर भी होता है कि सफलता के लिए वे किस तरह से काम करें। बॉस या लीडर के बारे में ज्यादातर लोगों में छवि ऐसे व्यक्ति की होती है जो मीटिंग्स का नेतृत्व करता है और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए हर समय तैयार रहता है। लेकिन सच यह है कि बॉस के सामने लगातार कई तरह की चुनौतियां भी होती हैं। उसे कई बार बेहद कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। सफलता या असफलता, दोनों का सेहरा उसके ही माथे बंधता है। यही नहीं, बॉस की चुनौतियां कभी खत्म नहीं होतीं। एक सफलता मिली तो अगली सफलता के लिए तैयारी और संगठन, कंपनी को आगे के मुकाम तक ले जाने के लिए उसे लगातार काम करते रहना होता है। एक लीडर अपने अधीनस्थ सहकर्मियों के परफॉर्मेस को मैनेज करता है, उनके बारे में फीडबैक देता है, समीक्षाएं करता है और उनके बीच काम को डेलीगेट करता है। ऐसा करने में उसका सामना कई जेनरेशन के कर्मचारियों से हो सकता है। आपके सामने जेनरेशन वाई के कर्मचारी तो आएंगे ही, पुरानी पीढ़ी के कर्मचारियों से भी आपका सामना होगा। अगर आपको लीडर बनना है, तो इन सबसे निपटने की कला आपको सीखनी होगी। ध्यान रहे लीडरशिप एक ऐसी स्किल है, जिसे आप सीख सकते हैं और उसको धार दे सकते हैं। आपको एम्प्लॉयीज को मोटिवेट, उत्साहित करने और उनका सम्मान हासिल करने के लिए ऐसी स्किल सीखनी ही होगी। 
अलग तरह की सोच जरूरी: एक लीडर की व्यक्तिगत निर्णय क्षमता एवं प्रेरणा पर बहुत कुछ निर्भर होता है। उसे व्यापक संभावनाओं के बारे में सोचना और भावनात्मक परिपक्वता दिखाना होता है। आपको मल्टीटास्कर होना चाहिए और सबसे बड़ी बात यह है कि गलतियों की आलोचना पर हर्ट फील नहीं करना चाहिए। अपनी आलोचना वाले फीडबैक को भी उत्साह के साथ स्वीकार करना आना चाहिए। अलग तरह की सोच, आई कैन डू एटिट्यूड, सफल होने की स्ट्रांग विल पॉवर, ग्लोबलाइज्ड सोच, टीम वर्क में हाई क्वॉलिटी एनालिसिस और ट्रांसपैरेंसी जैसे कई गुण एक सफल लीडर होने के लिए बहुत जरूरी हैं।
बेहतरीन कम्युनिकेशन जरूरी: एक लीडर में अच्छी तरह से कम्युनिकेट करने की स्किल होनी चाहिए। उसे अच्छे वक्ता के साथ अच्छा श्रोता भी होना चाहिए। उसे अच्छे सवालों के द्वारा सही जानकारी निकालने का कौशल भी आना चाहिए। आपको यदि लगता है कि आपकी बात सही तरीके से लोग समझ नहीं पा रहे, तो अपने सहकर्मियों से और बात करें तथा उनसे सवाल पूछें। इससे आपको समझ में आ जाएगा कि मुश्किल कहां हो रही है। लीडर में लोग एक तरह का करिश्मा, उसके चेहरे पर चमक और उसकी बातों में वजन भी ढूंढ़ते हैं। आप दूसरों की भावनाओं की कद्र जरूर करें, लेकिन अपनी बात प्रभावी तरीके से और दृढ़ता से रखें। 
बॉसेज पर नजर रखें: अगर आप वाकई लीडर बनना चाहते हैं, तो आपको अच्छे और बुरे दोनों तरह के बॉसेज के काम को गौर से देखना चाहिए। उन बॉसेज के कामकाज के तरीके को गौर से देखें जो आपको प्रभावित करते हैं। साथ ही यह भी गौर करें कि जिन्हें खराब बॉस माना जा रहा है, उनसे आखिर क्या गलतियां हो रही हैं। अगर आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आती है, जैसे किसी कर्मचारी को पिंक स्लिप देना या किसी अलोकप्रिय टास्क को देना, तो इस पर गंभीरता से विचार करिए कि आपके रोल मॉडल वाले बॉस ऐसी परिस्थिति को किस तरह से हैंडल करते थे।
मैं कहना बंद करें: लीडर को कभी भी ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ‘हम’ शब्द पर जोर देना चाहिए। आप कितने ही कॉन्फिडेंट हों, आपके पास कितना भी पावर हो, मैं शब्द का इस्तेमाल अच्छे लीडर बनने के रास्ते में एक बड़ा बाधक होता है। टीम में ऐसे मेंबर्स का चुनाव करें जो आपके काम को आगे बढ़ा सकें।
शेयर करना सीखें: एक अच्छे लीडर को अपने निचले कर्मचारियों से कई चीजें शेयर भी करनी पड़ती हैं। जब आप एक इंडिविजुअल परफॉर्मर होते हैं, तो अपनी सफलता की बहुत सी टिक छिपाए रहते हैं, क्योंकि आप दूसरे कर्मचारियों से प्रतिद्वंद्विता रखते हैं, लेकिन एक लीडर की भूमिका में आप ऐसा नहीं कर सकते। आपको अधीनस्थ कर्मचारियों को उन राज को बताना होगा, जिनसे बिक्री बढ़ती हो या क्लाइंट्स का भरोसा जीता जा सकता हो।
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभारजागरण समाचार 
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.