Friday, December 19, 2014

अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान की पुण्य तिथि पर विशेष

आज 19 दिसंबर को भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम् भूमिका निभाने वाले माँ भारती के वीर सपूत पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान और शहीद रोशन सिंह की 87वीं पुण्य तिथि पर हम उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और हमारे पाठकों को इन तीनों के सज्जीवन के बारे में बताने का प्रयास करते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि ये तीनों देशभक्त आज के ही दिन 1927 में भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ते हुए अंग्रेजों के हाथों शहीद हुए थे। इन पर लखनऊ के निकट काकोरी स्टेशन के पास ट्रेन लूटने का आरोप था और इसी के चलते बिस्मिल, अशफाक उल्ला, रोशन सिंह और राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दी गयी थी। तो आइये हम इन तीनों के जीवन पर थोडा प्रकाश डालते हैं।

स्मार्टफोन के लिए ये नौ एप्स हैं बड़े काम के

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नया साल शुरू होने में सिर्फ कुछ दिन बाकी रह गए हैं। अगर आप नए साल जश्न मनाना चाहते हैं या कहीं जाना चाहते हैं या फिर बिना झंझट के बिल भरना चाहते हैं और फोटो या वीडियो एडिट करना चाहते हैं तो गूगल प्ले पर कई काम के ऐप्स मौजूद हैं। क्या आप भी अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक और वॉट्सऐप ही यूज

ये हैं हिंदुस्तान के जुगाड़, किसी को पकड़ा पुलिस ने तो किसी ने किया पीएम को राजी

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नागपुर के एक व्यक्ति ने दो कारों को जोड़ लंबी कार बना डाली। इसकी लंबाई 8 मीटर तक है। बड़ौदा से नागपुर एक शादी में शामिल होने के लिए जैसे ही वह शहर में पहुंचा, आरटीओ ने कार्रवाई की। बताया गया कि  इस तरह की मूल गाड़ी का नाम लिमोजिन है। कीमत 10 करोड़ से 50 करोड़ तक हो सकती है। इस तरह की गाड़ी अपने इच्छानुसार बनाना मोटर एक्ट की अवहेलना है। ऐसे में आरटीओ को जानकारी मिलते ही गाड़ी पर कार्रवाई कर इसे जब्त कर लिया गया। गाड़ी (क्रमांक जीजे 06 सीएम 7374) मूलत: बड़ौदा के एक व्यक्ति की है। कार बनाने के लिए होंडा

Thursday, December 18, 2014

ऑनलाइन खरीददारी करें, लेकिन संभल कर: ध्यान रखें ये दस बातें

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क्रिसमस और नए साल के ऑफर्स के साथ ऑनलाइन शॉपिंग पर ढेरों ऑफर्स मिल रहे हैं। कंपनियां अपने-अपने तरीके से कस्टमर को रिझाने का प्रयास कर रही हैं। अमूमन देखा गया है कि नए साल या क्रिसमस से पहले लोग ढेर सारी शॉपिंग करते हैं। शॉपिंग करने के बाद बिलिंग के लिए आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सबसे अधिक लोकप्रिय है। भले ही बात ई-कॉमर्स की हो, ऑनलाइन टिकट बुक करना हो या फिर कोई अन्य ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करना हो,

डाक घर की इन पांच स्कीम्स में है बहुत फायदा

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बेहतर कल के लिए हम हमेशा नए विकल्पों की तलाश में रहते हैं। देश में म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट के निवेश के विकल्प होने के बाद भी कई निवेशक अब भी सुरक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं। सुरक्षित रिटर्न देने वाले साधनों में पोस्ट ऑफिस की स्कीमों का बड़ा आकर्षण रहा है। अच्छे रिटर्न के लिए लोग अक्सर गलत जगह अपना पैसा फंसा बैठते हैं। आज के समय में जरूरी है ऐसी स्कीम्स की जो न सिर्फ बेहतर रिटर्न दे बल्कि जिनमें जोखिम भी कम हो। ऐसा ही

सदाबहार: फुंसी से लेकर डायबिटीज, कैंसर तक का है सर्वसुलभ इलाज

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घर के आंगन, क्यारियों और उद्यानों में उगाए जाने वाला 'सदाबहार' एक औषधीय पौधा है, जिसका वानस्पतिक नाम कैथेरेन्थस रोसियस है। इस वनस्पति में विन्कामाईन, विनब्लास्टिन, विन्क्रिस्टीन, बीटा-सीटोस्टेराल जैसे महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं। दुनियाभर के हर्बल जानकार इसके औषधीय गुणों का बखान करते नहीं थकते और हिंदुस्तान के आदिवासी अंचलों में भी इसे महत्वपूर्ण हर्बल नुस्खे के तौर पर अपनाया जाता है।

पाक सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पूरा कश्मीर भारत का

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भले ही कश्मीर के एक बहुत बड़े भू-भाग पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया हो, पर पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत (सर्वोच्च न्यायालय) मानती है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान में आतंकवादी और वहां सत्ता और विपक्ष के नेता कुछ भी राग अलापते रहें पर हकीकत में देखा जाए तो कश्मीर भारत का ही अभिन्न हिस्सा है। 

आँखों की कुछ बीमारियां, जिनसे बचकर रहना है जरूरी

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अपनी आंखों की देखभाल की जिम्मेदारी हमारी खुद की है। बिना आंखों के हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। जरा सोचिए, जो लोग देख नहीं सकते, वे कैसा महसूस करते होंगे! इस दुनिया के ख़ूबसूरत नजारों को देखने के लिए आंखें हमें मिली हैं, लेकिन उम्र बढ़ने पर स्वाभाविक रूप से आंखों की रोशनी कम होने लगती है। इसके अलावा, कुछ बीमारियों के कारण भी आंखों की क्षमता पर असर पड़ता है। आजकल बदलती

Thursday, December 11, 2014

आम आदमी के 30 अधिकार, जिनसे हम रहते हैं अनजान

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Post published at www.nareshjangra.blogspot.com 
मानवाधिकार से मतलब मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता से है, जिसके सभी मनुष्य हकदार हैं। इन्हीं अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने के लिए हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। 1950 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में घोषणा के साथ इस दिन की शुरुआत हुई। 1948 में 10 दिसंबर को ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों पर एक सार्वभौम घोषणापत्रा जारी किया, जो मनुष्य के अधिकारों के बारे में बताता है। यहां हम इस घोषणापत्र में जारी उन 30 अधिकारों के बारे में ही बताने जा रहे हैं, जिनसे अक्सर लोग अनजान होते हैं।

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के घर की रिपेयरिंग का पाकिस्तान में विरोध

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पाकिस्तान के लायलपुर से फैसलाबाद बन चुके जिले के गांव बंगा में आठ करोड़ रुपए की लागत से राज्य सरकार की ओर से शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पुश्तैनी घर और उनके स्कूल का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, लेकिन कट्टरपंथी विचारधारा के हिमायती इसका विरोध कर रहे हैं। एक मार्केटिंग कंपनी की मैनेजर कनीज फातिमा ने सोशल साइट पर "भगत सिंह के घर की मरम्मत क्यों?" शीर्षक से लिखा है कि जो कौम अल्लाह के बजाय किसी सिख के घर को

कश्मीर: नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को दिया था सोने की जंजीर का लालच

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क्या देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर के तत्कालीन राज्य प्रमुख शेख अबदुल्ला को उनकी कश्मीर नीति पर इसी तरह से अड़े रहने की सलाह दी थी। एक बार तो इस बात पर भरोसा नहीं होता कि नेहरू ऐसा कर सकते हैं। शेख अब्दुल्ला ने अपनी किताब आतिशे चिनार में बताया है कि दिल्ली में एक बैठक के दौरान नेहरू ने उनके कान में कहा कि आप कश्मीर मामले पर ऐसे ही हिचकिचाएं तो हम आपके गले में सोने की जंजीर पहना देंगे। कश्मीर में शेख अब्दुल्ला ने महाराजा हरिसिंह के खिलाफ जो भी कदम उठाए उन्हे वह रियासत के

जानें क्यों महात्मा गांधी चाहते थे कश्मीर बन जाए पाकिस्तान का हिस्सा

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क्या महात्मा गांधी देश के विभाजन के समय कश्मीर रियासत का विलय पाकिस्तान में हो, के पक्षधर थे। एकाएक तो इस बात पर भरोसा नहीं होता। पर, कश्मीर के पहले राज्य प्रमुख शेख अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक "आतिशे चिनार" में बताया है कि इस राज्य में मुसलमानों की संख्या अधिक होने के कारण महात्मा गांधी इस रियासत का विलय पाकिस्तान में करने के पक्षधर थे। तत्कालीन नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख शेख अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि गांधीजी ने एक बार कहा था, 'चूंकि कश्मीर में मुसलमानों का बहुमत है अतः उसका विलय पाकिस्तान में हो जाना चाहिए।' शेख ने किताब में लिखा है 'मैंने चूंकि कश्मीर के एक हिंदू शासक के विरुद्ध विद्रोह करने की हिम्मत दिखाई थी इसलिए हिंदू संप्रदायवादियों की आंखों में हमेशा के लिए