5 अक्टूबर को वर्ल्ड टीचर्स डे के दिन यूनेस्को ने पहली बार यूएन द्वारा निर्धारित 2030 के वैश्विक शिक्षा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जरूरी शिक्षकों की संख्या संबंधी अांकड़ा जारी किया।
पूरी दुनिया में 6.9 करोड़ नए शिक्षकों की जरूरत: जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार इन लक्ष्यों को पूरा करने के
लिए दुनियाभर में अगले 14 सालों में प्राइमरी और सेकंडरी स्तर पर करीब 6.9 करोड़ नए शिक्षकों की आवश्यकता होगी। 2030 तक प्राइमरी स्तर पर 2.4 करोड़ और सेकंडरी स्तर पर 4.4 करोड़ शिक्षकों की आवश्यकता होगी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। इससे पहले यूनेस्को की रिपोर्ट बताया गया था कि दुनियाभर में करीब 25 करोड़ बच्चे प्राइमरी शिक्षा नहीं लेते हैं, जबकि कम कमाई वाले देशों में सिर्फ 14 फीसदी युवा ही अपर सेकंडरी स्तर की पढ़ाई पूरी करते हैं। | |||
अफ्रीकी अौर दक्षिण एशियाई देशों में शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी: क्षेत्रीय आंकड़ों के लिहाज से नए शिक्षकों की सबसे ज्यादा जरूरत अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई देशों में है। अफ्रीकी देशों में यूनिवर्सल प्राइमरी एंड सेकंडरी एजुकेशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए करीब 1.7 करोड़ शिक्षकों की आवश्यकता होगी।
प्राइमरी से ज्यादा सेकंडरी शिक्षकों की कमी: प्राइमरी स्तर पर आंकड़ा करीब 60 लाख और सेकंडरी स्तर पर 1.08 करोड़ है। इसी प्रकार दक्षिणी एशिया में प्राइमरी स्तर पर पीपुल टीचर रेशो 34:1 और सेकडरी स्तर पर 29:1 है, जो वैश्विक औसत 18:1 से कहीं ज्यादा है। दक्षिण एशियाई देशों में इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए करीब 1.5 करोड़ नए शिक्षकों की आवश्यकता होगी। इसमें से 41 लाख शिक्षक प्राइमरी स्तर पर और सेकंडरी स्तर पर 1.9 करोड़ शिक्षकों की आवश्यकता होगी। उत्तरी अमेरिका में यह आंकड़ा इसकी अपेक्षा बहुत कम है। उत्तरी अमेरिकी देशों मंे प्राइमरी स्तर पर करीब 8 लाख और सेकंडरी स्तर पर 18 लाख नए शिक्षकों की आवश्यकता होगी।
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