एन रघुरामन (मैनेजमेंट फंडा)
उस मल्टीप्लेक्स में मेरी सीट के सामने तीन सदस्यों का परिवार बैठा था। यह एक पूर्ण परिवार था, क्योंकि इसमें दो बच्चे थे और अपूर्ण इसलिए कि जैसा ज्यादातर भारतीय मानते हैं, इसमें बेटी और पिता नहीं थे। सिनेमा हॉल की बत्तियां बूझने के पहले दोनों बेटों के चेहरे देखकर मुझे लगा कि मां की बाईं ओर बैठा बेटा






