Saturday, January 7, 2017

लाइफ मैनेजमेंट: पिछली जीत के कारण भावी लड़ाई की अनदेखी करें

मैनेजमेंट फंडा (एन. रघुरामन)
इस बुधवार जैसे ही एक के बाद एक वक्ता उन पर तारीफों की वर्षा-सी करने लगे, वे उसकी अनदेखी करने के लिए मेरे नज़दीक आते गए। वे इतने विनम्र संकोची हैं कि एेसी प्रशंसा सुनना उनके बस की बात नहीं है। चूंकि मैं
उनके पास बैठा था, उन्होंने इस प्रशंसा से बचने के लिए मुझसे बातचीत शुरू कर दी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। अगले वक्ता छत्तीसगढ़ के कबीरधाम के सांसद अभिषेक सिंह थे। उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के कोई 20 हजार छात्रों को संबोधित करना शुरू किया, जो राज्य सरकार के मोटीवेशनल कार्यक्रम 'युवा प्रेरणा' का हिस्सा थे। यह कार्यक्रम 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती तक चलने वाला है। एक्सएलआरआई, जमेशदपुर के छात्र रहे अभिषेक हैंडसम, खूब पढ़ने वाले व्यक्ति हैं और भाषा पर भी उनका जबर्दस्त प्रभुत्व है। उन्होंने सबसे सफल क्रिकेटरों में से एक तथा मौजूदा भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले की जिंदगी की झलक प्रस्तुत करना शुरू की। 
अभिषेक ने कहा, 'एक मैच में आपके सामने बैठे इस व्यक्ति का जबड़ा टूट गया। टीम के हर सदस्य, मेडिकल एक्सपर्ट और परिवार के लोगों ने उन्हें आगे खेलने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। बड़े-से बैंडेज के साथ सिर्फ उन्होंने बैटिंग की बल्कि गेंदबाजी भी करके भारतीय टीम को वह मैच जीतने में मदद की।' स्टेडियम तब एक स्वर में विजयी स्वरों से गूंज उठा जब अभिषेक ने कुंबले की ओर इशारा करते हुए कहा, 'इस व्यक्ति को कौन भूल सकता है, जिसने एक मैच में पाकिस्तान के दसों विकेट गिराकर इतिहास बना दिया।' कुंबले ने कुछ शर्मिंदा होकर मेरी ओर देखा, जबकि 'पाकिस्तान और दस विकेट' जैसे शब्दों ने युवाओं को उत्साहित कर दिया। उसके बाद कुंबले संबोधित करने के लिए उठे। वहां मौजूद लोग रोमांचित हो गए कि वे जीत की ऐसी और कहानियां सुनाकर प्रेरित करेंगे, क्योंकि कार्यक्रम का नाम ही 'युवा प्रेरणा' था। 
कुंबले ने कुछ धीमे स्वर में बोलना शुरू किया। पूरा स्टेडियम सन्नाटे में डूब गया, क्योंकि हर व्यक्ति अपने इस हीरो को पूरी एकाग्रता से सुनना चाहता था। उन्होंने कहा, 'आप सबको नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ दस विकेट लेने का वाकया याद है। हां, वह सिर्फ आप सबके लिए पूरे देश के लिए बल्कि मेरे लिए भी खुशी का पल था। लेकिन, आप में से किसी को वह बात याद नहीं जो मुझे आज तक याद है। अगला मैच चार दिनों बाद ही कोलकाता के ईडन गार्डन पर था और वहां मुझे सिर्फ एक विकेट मिला। वह गेंदबाज जिसने चार दिन पहले दसों विकेट लिए थे, उसकी झोली में सिर्फ एक विकेट था।' भीड़ में चुप्पी छा गई। अब कुंबले की आवाज ऊंची हो गई, अभिषेक सिंह से भी ऊंची। वे कहने लगे, 'याद रखें मेरे लिए हर मैच शून्य से शुरू होता है। हर बार जब मैं मैदान पर उतरता था तो मुझे नई उपलब्धि हासिल करनी होती थी। 
भूतकाल के मेरे रिकॉर्ड कभी मेरी वकालत नहीं कर पाते थे। यही जीवन का नियम है। हर दिन ऊंचे उठने के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाएं और उसके लिए आप में शत-प्रतिशत समर्पण, प्रतिबद्धता होनी चाहिए।' फिर उन्होंने बताया कि उनके गृहनगर बेंगलुरू में बारिश की वजह से कैसे उनके दोस्त अभ्यास छोड़ देते थे, जबकि वे शहर में ऐसी जगह खोजते रहते थे, जहां बारिश हुई हो ताकि प्रैक्टिस जारी रखी जा सके। उन्होंने कहा, 'यह खेल के प्रति मेरा समर्पण था। हालांकि, माता-पिता की इच्छा के मुताबिक मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।' जब उन्होंने भाषण समाप्त किया तो देर तक तालियां बजती रहीं। 
फंडा यह है कि हर दिन शून्य से शुरू होता है और पिछली जीत भविष्य की लड़ाई की अनदेखी करने का कारण नहीं बनना चाहिए। 

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साभार: भास्कर समाचार 
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