Monday, January 29, 2018

Career: रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में 2022 तक तीन लाख से ज्यादा नौकरियों के अवसर

साभार: भास्कर समाचार
2022 तक देश की रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता को 175 गीगावॉट करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा इजाफा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में होगा। हालांकि दुनियाभर में रिन्यूएबल एनर्जी को वरीयता दी जा रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग, रिसर्च और मैनेजमेंट के छात्रों के लिए जॉब के मौके होते हैं।
दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन की बजाय रिन्यूएबल एनर्जी को वरीयता दी जा रही है। इस मामले में भारत भी पीछे नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। सरकार ने सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाकर 2022 तक 100 गीगावाट करने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 2022 तक 3 लाख से ज्यादा नई नौकरियां आएंगी। वहीं सबसे ज्यादा मौके सौर ऊर्जा के क्षेत्र में होंगे। इस लिहाज से युवाओं के लिए इसमें कॅरिअर के अच्छे मौके हैं। 
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2017 तक देश में रिन्यूएबल एनर्जी की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी (स्थापित क्षमता) कुल 58.3 गीगावॉट थी, जो देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता का करीब 17.7 फीसदी है। वहीं दूसरी तरफ रिन्यूएबल एनर्जी अट्रैक्टिव इंडेक्स, 2017 में भारत को दूसरा स्थान मिला है। इस लिहाज से निवेशकों के लिए भी यह एक आकर्षक क्षेत्र के रूप में उभरा है। अप्रैल, 2000 से सितंबर, 2017 के दौरान इस क्षेत्र में करीब 6.01 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। सरकार का लक्ष्य 2022 तक रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता बढ़ाकर 175 गीगाबाइट का पहुंचाना है। वर्तमान में रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता 8.39 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही है। वहीं यह अनुमान है कि 2020 तक देश की सौर ऊर्जा क्षमता 360 फीसदी तक बढ़ जाएगी। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और रिसर्च के क्षेत्र में जॉब के मौके होते हैं। ऐसे में अलग-अलग बैकग्राउंड के छात्र इसमें कॅरिअर बना सकते हैं। 
साइंस के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग और रिसर्च में अवसर: साइंस बैकग्राउंड के छात्र इसमें इंजीनियरिंग और रिसर्च क्षेत्र में कॅरिअर बना सकते हैं। हालांकि रिन्यूएबल एनर्जी के स्पेसिफिक कोर्स पोस्टग्रेजुएट स्तर पर ही संचालित किए जाते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स से बीई या बीटेक कोर्स करने वाले छात्र भी इस में कॅरिअर बना सकते हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स विषयों के साथ 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्रों को जेईई मेन में भाग लेना होगा। इसके स्कोर के आधार पर ही बीई या बीटेक कोर्स में प्रवेश मिलता है। रिन्यूएबल एनर्जी के एमटेक कोर्स में प्रवेश के लिए छात्रों के पास संबंधित स्ट्रीम से बीई, बीटेक या एमएससी की डिग्री होना आवश्यक है। अधिकांश संस्थानों में प्रवेश गेट के वैलिड स्कोर के आधार पर मिलता है। रिन्यूएबल एनर्जी से एमटेक या एमएससी कोर्स करने वाले छात्र रिसर्च क्षेत्र में भी कॅरिअर बना सकते हैं।
एनर्जी मैनेजमेंट भी हो सकता है बेहतर विकल्प: रिन्यूएबल एनर्जी में मैनेजमेंट के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए छात्रों को एनर्जी मैनेजमेंट का एमबीए या पीजीडीएम कोर्स करना होगा। देशभर के विभिन्न संस्थानों में यह कोर्स संचालित किए जाते हैं। 50 फीसदी अंकों के साथ किसी भी स्ट्रीम से बैचलर डिग्री करने वाले छात्र इसमें प्रवेश ले सकते हैं। कैट, जैट, मैट, सीमैट, एटीएम या जीमैट के वैलिड स्कोर के आधार पर छात्रों को ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। 
एनर्जी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों में अवसर: एनर्जी स्टडीज में पोस्टग्रेजुएशन के बाद आप पॉवर जनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसमिशन कंपनियों में रोजगार के अवसर होते हैं। इसके अलावा इपीसी, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग एंड कंसल्टिंग कंपनियों में भी जॉब की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। इसमें काम करने वाले प्रोफेशनल को कंजर्वेशन, कंसल्टेशन, इंजीनियरिंग एनालिसिस, प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, ऑप्टिमाइजेशन एंड फैसिलिटीज मैनेजमेंट से संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है।
शुरुअाती सैलरी 35 से 40 हजार रुपए प्रति माह: इस क्षेत्र में शुरुआती पैकेज के तौर पर 35 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह मिल जाता है। अनुभव और संस्थान के अनुसार पैकेज भिन्न हो सकता है। वहीं 4 से 5 वर्ष के अनुभव के बाद 8 लाख रुपए प्रति वर्ष तक का पैकेज मिलने की संभावना होती है। मल्टीनेशनल कंपनियों में ज्यादा पैकेज मिल सकता है।