Monday, January 29, 2018

वर्कप्लेस पर परफॉरमेंस बढ़ाने के लिए आराम और मेहनत के बीच ऐसे बनाएं संतुलन

साभार: भास्कर समाचार
श्वेता रैना हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल की ग्रेजुएट talerang.com की सीईओ 
फिलिप्स हेल्थ ट्रैक की रिसर्च के अनुसार अधिकांश भारतीय ज़रूरत से कम नींद लेते हैं। इसके कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। तेजी से बदलती जीवनशैली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने कई नई
समस्याओं को जन्म दिया है। यह तेजी से हमारे स्वास्थ्य, संबंध और यहां तक कि जॉब की परफॉर्मेंस को भी प्रभावित कर रहा है। यह हमारे संयम को कम करता है, जिसकी वजह से कई बार जल्दी में गलत फैसले भी हो जाते हैं। रिसर्च बताती हैं कि 16 घंटे तक लगातार काम करने के बाद दिमाग को कम से कम 8 घंटे के आराम की आवश्यकता होती है। यह कुछ तरीके हैं, जिसके आधार पर आप काम को ध्यान में रखते हुए जरूरी नींद पूरी कर सकते हैं। 
योजना बनाना और प्राथमिकताएं तय करना: अपनी रोजाना की योजना बनाएं, चाहे वह व्यक्तिगत हो या ऑफिस के काम संबंधी। इस योजना में अपने सोने और उठने के समय को भी शामिल करें। काम के लिए तय की गई समय सीमा के अनुसार प्राथमिकताओं को एक चार्ट में बांट लें। प्रभावी तरीके से काम करें, ताकि आपका ज्यादा समय व्यर्थ ना हो। उदाहरण के लिए यदि आप यात्रा कर रहे हैं, तो इस दौरान अपने बाकी बचे हुए मेल्स का जवाब दे सकते हैं। यदि आप अपने ऑफिस के समय के दौरान ही अपना काम पूरा करने में सफल रहते हैं, तो पूरी नींद ले सकते हैं। यह आदत खराब होती है, जब लोग ऑफिस के दौरान ही सोने लगते हैं। यह आप के व्यक्तिगत जीवन और वर्कप्लेस के लिहाज से भी ठीक नहीं है। 
टेक्नोलॉजी का उपयोग: अब कई ऐसे प्रोडक्ट बाजार में आ चुके हैं, जिनका उपयोग आप बेहतर नींद के लिए भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ प्रोडक्ट ऐसे हैं, जिन्हें सोते समय अपने तकिए के नीचे रख सकते हैं। ये आपकी नींद को ट्रैक में सक्षम हैं। इसी प्रकार स्मार्ट वॉच की मदद से भी अपनी नींद को ट्रैक किया जा सकता है। यह विभिन्न प्रकार से फिटनेस ट्रैक करने में भी मदद करता है। शरीर की फिटनेस का सीधा संबंध वर्कप्लेस पर आपके परफॉर्मेंस से है। 
आराम करना: अपने काम को प्रभावी तरीके से करना जरूरी है, लेकिन इसके बावजूद अपने लिए भी कुछ समय निकालना चाहिए। ऐसे में आप रोजाना व्यायाम और योग की मदद ले सकते हैं। ये आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ तो रखेंगे ही, साथ ही मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखेंगे। इससे आपको बेहतर नींद में भी मदद मिलेगी, हालांकि कॉफी जैसी कुछ चीजों को कम करना ही बेहतर है। स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली किरणें नींद को प्रभावित करती हैं, इसलिए कोशिश यह करें कि कम से कम समय स्मार्टफोन पर लगाएं। 
ज्यादा सोने वाले लोगों को अालसी मानना एक सामान्य धारणा है। कई बार हम खुद को भी बिना रुके काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जबकि कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि बेहतर नींद लेने से प्रोडक्टिविटी के स्तर पर सुधार आता है और आपका रचनात्मक स्तर भी बढ़ता है। एक निश्चित सीमा तक पर्याप्त नींद लेने वाले कर्मचारी बहुमूल्य हो सकते हैं।