Thursday, November 3, 2016

जानिए सातवें वेतन आयोग में क्या क्या रह गई कमी जो नाराज कर रही है कर्मचारियों को

बेशक हरियाणा सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने के निर्णय का पूरे देश में प्रचार कर रही है। मगर आयोग की सिफारिश का वास्तविक और पूरा लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश महासचिव का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों को लाभ कम मिलेगा, यह
सिर्फ आंकड़ों की जुमलेबाजी है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर किए बिना ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों लागू की, जिससे कर्मचारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 
  • इसमें कर्मचारियों को जनवरी, 2014 से लागू की गई अंतरिम राहत को बंद कर दिया, जबकि पहले वेतन आयोगों की सिफारिशों में इसे मूल वेतन मे जोड़ा गया था।
  • पुलिस कर्मचारियों को जनवरी 2014 से लागू पांच हजार रुपये जोखिम भत्ता 31 मार्च के बाद बंद कर दिया जाएगा।
  • सरकारी विभागों में कार्यरत ठेका कर्मियों के वेतन में एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं की।
  • संघ ने परिवार की चार इकाई मानकर 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग की थी, लेकिन सरकार ने 16,900 रुपये ही किया है।
  • वेतन आयोग ने नई नेशनल पेंशन स्कीम को बंद करके बेहतर स्कीम लागू करने की सिफारिश को नहीं माना।
  • चुनाव पूर्व जारी घोषणा पत्र में पंजाब के समान वेतन देने के वायदे पर अमल नहीं।
  • छठे वेतन आयोग में ग्रेड-पे व भत्तों के भेदभाव को दूर नहीं किया गया। जो ग्रेड-पे अपग्रेड किए हैं, उन्हें भी जनवरी 2006 से लागू करने की बजाय जनवरी 2016 से लागू करने की बात कही गई है।
  • रिपोर्ट में विभिन्न विभागों मे खाली पड़े पदों को पक्की भर्ती से भरने की कोई झलक नहीं।
  • न्यूनतम व अधिकतम वेतनमान का अनुपात संघ की मांग अनुसार 1:7 करने की बजाय 1:14 कर दिया।
  • रिटायर्ड कर्मचारियों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की।
  • बोर्डो, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों व विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों पर वेतन आयोग की सिफारिश लागू नहीं की और न ही इनको लागू करने के लिए समयबद्ध किया गया।
  • हरियाणा प्रतिव्यक्ति आय में देश में पांचवें स्थान पर है। केंद्रीय राष्ट्रीय औसत आय से 1.79 गुणा व पंजाब से 1.46 गुणा ज्यादा है। इसलिए संघ ने केंद्रीय कर्मचारियों से 30 प्रतिशत बढ़ोतरी यानी 44.29 करने की तर्कसंगत मांग की थी। लेकिन सरकार ने कुल वेतन में दस वर्ष बाद मात्र 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जो नाकाफी है।
  • संघ ने गुणांक फेक्टर 3.35 की मांग की थी, लेकिन सरकार ने गुणांक फेक्टर 2.57 किया है,जिससे कोई खास लाभ नहीं हो रहा।सुनवाई नहीं हो रही है। जिसके कारण कर्मचारियों को मजबूर होकर धरने-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं।

Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभारजागरण समाचार 
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.