Friday, September 9, 2016

छठे वेतन आयोग की विसंगतियां नहीं हो रही दूर, कर्मचारी नाराज

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने ढ़ाई लाख कर्मचारियों की छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर नहीं करने पर नाराजगी जाहिर की है। संघ के नेताओं ने कहा है कि सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए गठित कमेटी को सुझावों की लंबी फेहरिस्त सौंपी गई थी। यदि कमेटी ने इन सुझावों की भी अनदेखी की तो प्रदेशव्यापी
आंदोलन छोड़ दिया जाएगा। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। संघ के प्रधान धर्मबीर फौगाट व महासचिव सुभाष लांबा ने यहां बताया कि छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने, पंजाब के समान वेतनमान के वादे तथा सातवें वेतन आयोग को लागू करने पर विचार विमर्श के लिए राज्य कार्यकारिणी की मीटिंग 10 व 11 सितंबर को कर्मचारी भवन, रोहतक में बुलाई है। संघ के वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री, मुख्य संगठनकर्ता वीरेंद्र सिंह डंगवाल व उप महासचिव जीवन सिंह ने बताया कि सरकार ने छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने के लिए गठित आयोग की सिफारिशों को सार्वजनिक नहीं किया। एसीपी व पदोन्नति एवं डायरेक्ट भर्ती वाले कर्मचारियों की विसंगतियां ही दूर की गई हैं। महासचिव सुभाष लांबा के अनुसार केंद्र सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पे-बैंड 5200-20200 ग्रेड-पे 1800 है। लेकिन हरियाणा में इसी श्रेणी के कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग में 4440-7440 ग्रेड-पे 1300 दिया गया था। इसी प्रकार पे-बैंड-2 के कर्मचारियों को केन्द्र में 9300-34800 ग्रेड-पे 4200 दिया है और हरियाणा में इस पे-बैंड में 3200 ग्रेड-पे दिया गया है। इस भेदभाव को पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी दूर नहीं किया था और न ही भाजपा सरकार ने इसे दूर किया है। केन्द्र सरकार में कम से कम 1500 रुपए ट्रेवलिंग अलाउंस मिलता है, लेकिन हरियाणा में एक पैसा नहीं मिलता। इसी प्रकार शिशु शिक्षा भत्ता 1000 रुपए प्रति बच्चा मिलता है, लेकिन राज्य में 750 रुपए मिलता है और वह भी बच्चे जब हायर एजुकेशन लेते हैं, तो काट दिया जाता है।
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साभारजागरण समाचार 
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