Tuesday, September 13, 2016

निवेशकों के 55 हजार करोड़ हड़पने वाली पर्ल्स कंपनी के खाते फ्रीज़

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पीएसीएल ग्रुप और इसकी सहयोगी 640 कंपनियों के बैंक खाते, डीमेट और म्यूचुअल फंड होल्डिंग फ्रीज कर दिए हैं। सेबी ने यह निर्देश पीएसीएल से पांच करोड़ निवेशकों के करीब 55,000 करोड़ रुपए वसूलने के मकसद से जारी किया है। सेबी ने बैंकों से पीएसीएल के लोन खातों की भी सारी
जानकारी मांगी है। साथ ही उन संपत्तियों का ब्योरा भी, जिन्हें गिरवी रखकर यह लोन लिया गया है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। पीएसीएल ने जनता से खेती रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर धन जुटाया था। सेबी ने जांच में पाया कि कंपनी ने 18 साल के दौरान गैरकानूनी सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के जरिये 5 करोड़ लोगों से 49,100 करोड़ रु. जुटाए थे। यह रकम ब्याज समेत बढ़कर 55,000 के पार पहुंच चुकी है। देशभर के निवेशकों ने जब अपने पैसे वापस मांगने चाहे तो पीएसीएल आना-कानी करने लगी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शीर्ष कोर्ट के आदेश पर सेबी ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है ताकि पीएसीएल की अटैच संपत्ति बेचकर सही निवेशकों को पैसा लौटाया जा सके। 
इस समिति के अध्यक्ष पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा हैं। समिति निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए संपत्तियों की बिक्री का काम देख रही है। निवेशकों का पैसा लौटाने से पहले इस बात की पुष्टि की जाएगी कि वे सही निवेशक हैं। समिति ने 192 जिलों में ग्रुप की जमीनों की बिक्री की प्रक्रिया शुरू की है। 
सेबी ने निवेशकों को उनके पैसा वापस दिलाने की दिशा में पिछले महीने पीएसीएल की 44 गाड़ियों की नीलामी भी की थी। पीएसीएल ने एक पत्र में स्वीकार किया है कि उसने निवेशकों से जुटाए पैसे से सहयोगी कंपनियों के नाम पर खेती की जमीन या गैर-कृषि जमीनें खरीदी हैं। 

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साभार: भास्कर समाचार 
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